Wednesday, 30 May 2012

मेरा आइना है तू

मेरा आइना है तू ,
तुझमे मैं खुद को ढूंढ लेती हूँ ,
अपनी परछाईं भी पहचान नहीं पाती हूँ ,
जब कभी सांस तेरी सांस के संग लेती हूँ |
क्या बता पायेगा तू मुझको ,
मुझको हर शय में नज़र किसलिए तू आता है ,
तू मुझे दर्द भी देता है अगर जान मेरी ,
तो भी तू जान से प्यारा क्यूँ हुआ जाता है ,
तुझको न देखूं तो आँखों में नमी होती है ,
तुझको न सोचूँ तो दिल भी उदास होता है ,
हाँथ बस तेरी ही तस्वीर रचा करते हैं,
और ज़हन भी मेरा बस तेरा हुआ जाता है ,
पाँव भी तेरी तरफ बेवजह ही बढ़ते  हैं ,
कौन है तू मेरा किस दुनिया से तू आया है ,
जब कभी ये सवाल दिल में मेरे आता है ,
फिर वही लगता है ,
मेरा आइना है तू ,
तुझमे मैं खुद को ढूंढ लेती हूँ |

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