Thursday, 25 April 2013

बदलते रिश्ते

नए  कपडे नयी बातें नया उनवान है उनका ,
नयी हसरत नए सपने नया पैगाम  है उनका|
जो कल तक बस हमारी गोद में सर रख के सोते थे ,
नयी तकिया , नयी चादर , नया आराम है उनका |
मेरी आँखों से देखते थे जो सपने कल के ,
नए हैं रंग नए ढंग नया अंदाज़ है उनका |
कलम चुप हो गयी उनकी जो लिखती थी हमारा नाम ,
नए रिश्ते  नए चेहरे नया भगवान् है उनका|



Monday, 28 January 2013

रस्ते पे चल पड़े थे मुसाफिर की तरह हम ,
मंजिल का था पता नहीं जाने था कौन गम ।
जिसने कहा था साथ न छोडेंगे उम्र भर ,
वो ही है मेरा अब नहीं कैसे सहें ये हम ।
सरगम के सात सुर की तरह दिल में बस गया ,
अब बोलते भी हैं तो बजता है वो हर दम ।
सहने की बात ये नहीं सह सकते थे कुछ भी
पर उसकी जुदाई को भला कैसे सहें हम ।
आँखों की गर्मियों से पिघल कर निकल पड़ा ,
दिल में छुपा था उसका दिया ज़ख्मे तर से ग़म ।
कहता था एक जैसे नहीं होते है सब यार ,
पर करके वार खुद को ही झुठला गया है 
ईश का वरदान है
फिर तुम्हारा यूँ मुझे स्वीकार लेना ,
ईश का वरदान है
तेरा मुझको साथ चलने का सदा अधिकार देना ,
ईश का वरदान है
तू और तेरा साथ मुझको |
बेसाख्ता वो हमसे यूँ लड़ते चले गए
और उनकी इस ऐडा पे हम मरते चले गए ।
कहते रहे वो हमसे बेरुखी के हर इक लफ्ज़ ,
और हम उन्ही की राह पर बढ़ाते चले गए ।
मौका भी था दस्तूर भी कहने का दिल की बात ,
ना जाने फिर भी हम वहां क्यूँ मौन रह गए ।
मुझे फिर से नहीं अब खोलनी हैं सांकलें दिल की ,
है दुनिया में

Wednesday, 15 August 2012

दिल में है विश्वास नहीं

अब दिल में है विश्वास नहीं ,
जीने की कोई चाह नहीं ,
सब झूठे और मक्कार मिले ,
क्यूँ इस दुनिया में प्यार नहीं |
हमने गंगा बन कर सबके ही पापों का संघार किया ,
हमने भोले बन कर देखो हर बार सदा विषपान किया ,
जिसको चाहा दिल से चाहा बस एक गुनाह यही था पर ,
इस एक समर्पण पर मुझको क्यूँ साथ तेरा वरदान नहीं |
अब दिल में है विश्वास नहीं ,
जीने की कोई चाह नहीं ,
सब झूठे और मक्कार मिले ,
क्यूँ इस दुनिया में प्यार नहीं |

प्यार की शुरुआत

फिर हमसे एक गुनाह की शुरुआत हो गयी ,
सोचा नहीं समझा नहीं ये बात हो गयी |
कैसे तुम्हे समझाएं ये कैसे ये बताएं ,
हमने जलाये दीप फिर भी रात हो गयी |
वरदान में तो हमको मिली थी बड़ी खुशियाँ ,
फिर भी न जाने कैसे ये बरसात हो गयी |
हर बार की तरह है उसी राह पर हमदम ,
जिस राह पे काँटों से थी पहचान हो गयी |
जो हमको मिले थे हमारे दोस्त बन के वो ,
अपने नहीं थे बात सरेआम हो गयी |
फिर से करी रोशन है जिसने जीने की शमाँ ,
उस शख्स से फिर प्यार की शुरुआत हो गयी |