Wednesday, 27 June 2012
Tuesday, 26 June 2012
Sunday, 24 June 2012
तुम्हारी मेहरबानी है
मै जो करता हूँ वो अब तो तुम्हारी ही निशानी है ,
भले हों लब कि मुस्काहट या वो आँखों का पानी है ,
मेरी हर बात दुनिया को अदा लगती है लेकिन प्रिय ,
मेरी हर एक आदत बस तुम्हारी मेहरबानी है |
भले हों लब कि मुस्काहट या वो आँखों का पानी है ,
मेरी हर बात दुनिया को अदा लगती है लेकिन प्रिय ,
मेरी हर एक आदत बस तुम्हारी मेहरबानी है |
समर्पण
समर्पण आज कल द्वापर कि रचनाओं में मिलता है ,
जहाँ राधा पुकारे तो किशन घर से निकलता है ,
तेरी आँखों में छिप कर रह गए थे चंद जो आँसू ,
उन्हें मोती समझने वाला मन अब तो न मिलता है |
जहाँ राधा पुकारे तो किशन घर से निकलता है ,
तेरी आँखों में छिप कर रह गए थे चंद जो आँसू ,
उन्हें मोती समझने वाला मन अब तो न मिलता है |
कुमार विश्वास जी के लिए |
कलरव जन्मा सूनेपन से , अभावों में ही भाव जगे ,
पीड़ा ने हँसाना सिखलाया , फूलों के ही दिल में घाव मिले ,
सरिताओं ने बह कर मुझको आगे बढ़ाना सिखलाया है ,
शैलों पर घन घन घिर मेघों ने राग मल्हार सुनाया है ,
जब दर्द भरी मधुशाला है तो हाला खाली क्यूँ होगी ,
वेदना ह्रदय में छुपी अगर तो आँखें खाली क्यूँ होंगी ,
तन मन तो खुद ही डूबा है , हर दर्द हमें पीना होगा ,
"विश्वास" सुनो मैं कहती हूँ , मरते दम तक जीना होगा|
ऊपर कि कुछ पंक्तियाँ श्री कुमार विश्वास जी कि निम्न पंक्तियों से जन्मी हैं :-
पीड़ा ने हँसाना सिखलाया , फूलों के ही दिल में घाव मिले ,
सरिताओं ने बह कर मुझको आगे बढ़ाना सिखलाया है ,
शैलों पर घन घन घिर मेघों ने राग मल्हार सुनाया है ,
जब दर्द भरी मधुशाला है तो हाला खाली क्यूँ होगी ,
वेदना ह्रदय में छुपी अगर तो आँखें खाली क्यूँ होंगी ,
तन मन तो खुद ही डूबा है , हर दर्द हमें पीना होगा ,
"विश्वास" सुनो मैं कहती हूँ , मरते दम तक जीना होगा|
ऊपर कि कुछ पंक्तियाँ श्री कुमार विश्वास जी कि निम्न पंक्तियों से जन्मी हैं :-
"कलरव ने सूनापन सौंपा ,मुझको अभाव से भाव मिले,
पीडाऒं से मुस्कान मिली हँसते फूलों से घाव मिले,
सरिताऒं की मन्थर गति मे मैने आशा का गीत सुना,
शैलों पर झरते मेघों में मैने जीवन-संगीत सुना,
पीडा की इस मधुशाला में,आँसू की खारी हाला में,
तन-मन जो आज डुबो देगा,वह ही युग का मीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है,तब तक मुझको जीना होगा ....."
पीडाऒं से मुस्कान मिली हँसते फूलों से घाव मिले,
सरिताऒं की मन्थर गति मे मैने आशा का गीत सुना,
शैलों पर झरते मेघों में मैने जीवन-संगीत सुना,
पीडा की इस मधुशाला में,आँसू की खारी हाला में,
तन-मन जो आज डुबो देगा,वह ही युग का मीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है,तब तक मुझको जीना होगा ....."
Saturday, 23 June 2012
आग लगानी होगी |
नयी इबारत लिखनी है तो स्याह कहीं से लानी होगी ,
और ह्रदय में न बुझ पाए ऐसी आग लगानी होगी |
आम लोग तो उठते खाते सोते हैं और चल देते हैं ,
पर तुझको इन आम जनो में फिर से क्रांति जगानी होगी |
और ह्रदय में न बुझ पाए ऐसी आग लगानी होगी |
गाँधी बाबा कि लाठी और वीर भगत सिंह कि क़ुरबानी ,
नवयुवकों को हर पल निस दिन तुझको याद दिलानी होगी |
और ह्रदय में न बुझ पाए ऐसी आग लगानी होगी |
अन्ना , बाबा रामदेव सब जूझ रहे है संरचना से ,
ऐसे में आगे बढ़ कर तुझको भी ज्योत जलानी होगी |
और ह्रदय में न बुझ पाए ऐसी आग लगानी होगी |
खतरे में हैं भारत माता ,जीवन संकट आन पड़ा है ,
ऐसे में अपनी मैया कि तुझको आन बचानी होगी |
और ह्रदय में न बुझ पाए ऐसी आग लगानी होगी |
मर्यादा पुरुषोत्तम तो अब कोई नहीं जन्मेगा लेकिन ,
हर बच्चे में राम कृष्ण कि आत्मा तुझे मिलानी होगी |
और ह्रदय में न बुझ पाए ऐसी आग लगानी होगी |
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