Tuesday, 27 June 2017

आज फिर
डमरू के नाद में 

Tuesday, 29 October 2013

प्रगतिशीलता को तुम अपने जीवन के हर पल में धारो ,
उन्नति को ही जीवन का आधार बना कर तुम रख डालो ,
ले कर के प्रेरणा का सहारा मुख से अमृत रस बरसाओ ,
बनते बनते जीवन में तुम स्वयं प्रेणना स्रोत बन जाओ ।

Thursday, 25 April 2013

बदलते रिश्ते

नए  कपडे नयी बातें नया उनवान है उनका ,
नयी हसरत नए सपने नया पैगाम  है उनका|
जो कल तक बस हमारी गोद में सर रख के सोते थे ,
नयी तकिया , नयी चादर , नया आराम है उनका |
मेरी आँखों से देखते थे जो सपने कल के ,
नए हैं रंग नए ढंग नया अंदाज़ है उनका |
कलम चुप हो गयी उनकी जो लिखती थी हमारा नाम ,
नए रिश्ते  नए चेहरे नया भगवान् है उनका|



Monday, 28 January 2013

रस्ते पे चल पड़े थे मुसाफिर की तरह हम ,
मंजिल का था पता नहीं जाने था कौन गम ।
जिसने कहा था साथ न छोडेंगे उम्र भर ,
वो ही है मेरा अब नहीं कैसे सहें ये हम ।
सरगम के सात सुर की तरह दिल में बस गया ,
अब बोलते भी हैं तो बजता है वो हर दम ।
सहने की बात ये नहीं सह सकते थे कुछ भी
पर उसकी जुदाई को भला कैसे सहें हम ।
आँखों की गर्मियों से पिघल कर निकल पड़ा ,
दिल में छुपा था उसका दिया ज़ख्मे तर से ग़म ।
कहता था एक जैसे नहीं होते है सब यार ,
पर करके वार खुद को ही झुठला गया है 
ईश का वरदान है
फिर तुम्हारा यूँ मुझे स्वीकार लेना ,
ईश का वरदान है
तेरा मुझको साथ चलने का सदा अधिकार देना ,
ईश का वरदान है
तू और तेरा साथ मुझको |
बेसाख्ता वो हमसे यूँ लड़ते चले गए
और उनकी इस ऐडा पे हम मरते चले गए ।
कहते रहे वो हमसे बेरुखी के हर इक लफ्ज़ ,
और हम उन्ही की राह पर बढ़ाते चले गए ।
मौका भी था दस्तूर भी कहने का दिल की बात ,
ना जाने फिर भी हम वहां क्यूँ मौन रह गए ।
मुझे फिर से नहीं अब खोलनी हैं सांकलें दिल की ,
है दुनिया में

Wednesday, 15 August 2012

दिल में है विश्वास नहीं

अब दिल में है विश्वास नहीं ,
जीने की कोई चाह नहीं ,
सब झूठे और मक्कार मिले ,
क्यूँ इस दुनिया में प्यार नहीं |
हमने गंगा बन कर सबके ही पापों का संघार किया ,
हमने भोले बन कर देखो हर बार सदा विषपान किया ,
जिसको चाहा दिल से चाहा बस एक गुनाह यही था पर ,
इस एक समर्पण पर मुझको क्यूँ साथ तेरा वरदान नहीं |
अब दिल में है विश्वास नहीं ,
जीने की कोई चाह नहीं ,
सब झूठे और मक्कार मिले ,
क्यूँ इस दुनिया में प्यार नहीं |

प्यार की शुरुआत

फिर हमसे एक गुनाह की शुरुआत हो गयी ,
सोचा नहीं समझा नहीं ये बात हो गयी |
कैसे तुम्हे समझाएं ये कैसे ये बताएं ,
हमने जलाये दीप फिर भी रात हो गयी |
वरदान में तो हमको मिली थी बड़ी खुशियाँ ,
फिर भी न जाने कैसे ये बरसात हो गयी |
हर बार की तरह है उसी राह पर हमदम ,
जिस राह पे काँटों से थी पहचान हो गयी |
जो हमको मिले थे हमारे दोस्त बन के वो ,
अपने नहीं थे बात सरेआम हो गयी |
फिर से करी रोशन है जिसने जीने की शमाँ ,
उस शख्स से फिर प्यार की शुरुआत हो गयी |

तरफदारी

Monday, 13 August 2012

फिर प्रणय की बात होगी|

फिर प्रणय की बात होगी,
रात बीती है बहुत दिन बाद फ़िर है प्रात आई,
और जीवन ने खुशी से फिर करी है यूँ सगाई ,
झूठ सारे खो गए है, सत्य ने अवाज़ दी है,
मौन मुखरित हो रहा हैं, प्रीत ने बरसात की है ,
आज फिर इस नव घड़ी में इक नवल मुसकान होगी,
फिर प्रणय की बात होगी|

तुम्हे आना हो आ जाओ

सफर पर चल पड़े हैं हम तुम्हे आना हो आ जाओ ,
अकेले लड़ रहे हैं जिंदगी से ये समझ जाओ |
               सफर पर चल पड़े हैं हम तुम्हे आना हो आ जाओ |
बहुत नादानियाँ की है बहुत तुमको सताया है ,
अगर जो मानते हो हमको अपना माफ कर जाओ |
               सफर पर चल पड़े हैं हम तुम्हे आना हो आ जाओ |
तुम्हारे थे बहुत कुछ हम , हमारे थे बहुत कुछ तुम ,
अगर ये याद हो तुमको तो वापस लौट कर आओ |
               सफर पर चल पड़े हैं हम तुम्हे आना हो आ जाओ |
समझ आती नहीं हमको हमारे दिल की मजबूरी ,
अगर बिन बोले तुम समझो तो हमको भी ये समझाओ |
               सफर पर चल पड़े हैं हम तुम्हे आना हो आ जाओ |
ये दुनिया है बड़ी संगदिल बड़ी झूठी बड़ी मक्कार ,
हमें दुनिया के अच्छे रुख को तुम न बतलाओ |
                सफर पर चल पड़े हैं हम तुम्हे आना हो आ जाओ |

Saturday, 11 August 2012

परिचय हुआ है |

आज फिर मेरे निकेतन से मेरा परिचय हुआ है |
मैं भटक कर आयी दुनिया देख ली सारी दिशाएं ,
पर  सकल जग में मिली बस वेदनाएं वेदनाएं ,
टूट कर बिखरी बहुत जब दर्द ने चीत्कार मारी ,
कोई न था साथ मेरे थी तनिक संवेदनाएं |
फिर अकेली बेसहारा ढूँढती कोई किनारा 
प्रश्न खुद से कर रही थी तब मिला मुझको सहारा ,
आज फिर मेरा प्रिये से प्रेमवश परिणय हुआ है ,
                   आज फिर मेरे निकेतन से मेरा परिचय हुआ है |
जब किया विश्वास दुनिया पर मिला बस झूठ मुझको ,
प्रेम से परिणय किया तो फिर मिला रणछेत्र मुझको ,
काम , माया , क्रोध के मुझको मिले लाखों पुजारी ,
पर मिला न संत कोई देख ली दुनिया तिहारी ,
आज फिर एक बार सुन शिव ,सत्य का दर्शन हुआ है ,
                   आज फिर मेरे निकेतन से मेरा परिचय हुआ है |
स्वांस  टूटी आस टूटी , हर मनोरथ चाह रूठी ,
प्रेम की हर डोर टूटी ,तिमिर में हर रात डूबी ,
अश्रु फूटे , अधर रूठे , मौन से संगम हुआ था ,
जब लगा था तुम नहीं प्रिय खुद पे ही कुछ भ्रम हुआ था ,
आज तुम जब साथ फिर से ईश का वंदन हुआ है ,
                   आज फिर मेरे निकेतन से मेरा परिचय हुआ है |

सत्य से परिचय हुआ है

आज दिल हल्का हुआ है ,
मान कर सबी गलतियां ,
फिर  सत्य से परिचय हुआ है |

कल तलक हम चल रहे थे ,
भिन्न  पर विश्वास करके,
और  खुद को छल रहे थे ,
अनृत का सम्मान करके,
मधु  सरीखी जिंदागी में ,
गरळ का संचन हुआ है |
                     सत्य से परिचय हुआ है |
दंभ उसको है बहुत , 
वो बन गगनचर उड़ रहा है |
छोड़ कर सारे अनुग्रह ,
राह अपनी चल रहा है ,
इसलिए वह स्वयं ,
अपने आप का दुश्मन हुआ है |
                    सत्य से परिचय हुआ है |
                   



Tuesday, 7 August 2012



न होता

चंद बातें




Friday, 3 August 2012

चार चार पंक्तियाँ

1

Saturday, 28 July 2012

मुद्दत बाद

मुद्दत बाद दुआ को मेरे हाँथ उठे थे ,
मुद्दत बाद मेरे सर पर एक हाँथ आया था |

मुद्दत बाद हँसे थे मेरे सम्पुट पट भी ,
मुद्दत बाद खुशी का आँसू आँख आया था |
मुद्दत बाद तमन्नाओं ने फिर करवट बदली थी ,
मुद्दत बाद किसी का चेहरा याद आया था,
मुद्दत बाद ह्रदय मेरा जीना सीखा था ,
मुद्दत बाद किसी ने उसको तडपाया था|
मुद्दत  बाद दौड़ कर छू लूं चाँद लगा था ,
मुद्दत बाद ह्रदय कुसमित हों मदमाया था ,
मुद्दत बाद किसी के स्वर की बारिश से फिर ,
ह्रदय मेरा कुछ सकुचाया कुछ शरमाया था |
फिर मुद्दत के बाद वही एहसास मिला था ,
धोखों पर धोखों का मुझको त्रास मिला था ,
तुम शिव को अपना कहती हों तो लो झेलो ,
गरल मुझे हर बार सदा वरदान मिला था |




कहेगा क्या कि उसके पास कहने को नहीं कुछ भी ,
मोहब्बत झूठ थी उसक