Sunday, 3 June 2012

मात खा गया

एक टूटा हुआ ख्वाब मेरे हिस्से आ गया ,
वो टूट के बिखरा तो मेरे पास आ गया |
जब तक न मिला दर्द मेरा हों न सका वो ,
आँसू मिले तो वो हमारे साथ आ गया |
तनहाइयों ने उसको यूँ गुमराह कर दिया ,
बस प्यार कि नज़र से ही वो मात खा गया |
सोचा नहीं था छोड़ के वो जायेगा कभी ,
था डूबते में जिसका मुझे हाँथ आ गया |
मैं रोया बहुत पर वो नहीं लौट के आया ,
वो वक्त था मैं जिससे यार मात खा गया |
क्यूँ लग रहा है हमको छिपा कुछ रहे हों तुम ,
आँखों से अश्क पोछ के क्यूँ आ रहे हों तुम |

ये मज़हबी दुनिया है सियासत से जो है चलती ,
इसको वफ़ा का पाठ पढ़ा क्यूँ रहे हों तुम |

मजबूरियों को जिसने मुकद्दर समझ लिया ,
जीने कि राह उसको सिखा क्यूँ रहे हों तुम |

जिसको तुम्हारे प्यार कि है कद्र तक नहीं ,
उसको  भला ये प्यार जता क्यूँ रहे हों तुम |




मैंने कल मिटते देखा है ,
दूर खड़े उस एक मनुज को ,
मृत्युंजय का चोगा पहने ,
जीवन  से लड़ते देखा है |
जयी समझ कर खुद को उसने
मृगतृष्णा में देखो पड़के,
अपना जीवन नष्ट किया है ,
खुद को कुछ पथ भ्रष्ट किया है
मैंने कल उस भीष्म सरीखे
मानव को फिर से अपनी ही
एक अटल आग्नेय प्रतिज्ञा
से पीछे हटते देखा है
मैंने कल मिटते देखा है ...........
ह्रदय एक वैराग्य बसाये ,
तन पर धूनी भस्म रमाये ,
मन मस्तिष्क कुंवारा करके ,
आत्मा को बिन ब्याहा रख के ,
मैंने कल एक सन्यासी को ,
जोगिया रंग कि चादर डाले ,
नित्य लगन अनिमेष नयन से ,
किसी  एक अनजान नज़र की ,
राहों को तकते देखा है ,
मैंने कल मिटते देखा है |
बताऊँ किस तरह तुमको कि किस किस ने सताया है ,
दुखाया है हमारा दिल , हमें तोड़ा जलाया है ,
तुम्हें है आज हमसे प्यार क्यूंकि दूर से देखा ,
जिन्होंने पास से देखा वो रुक एक पल न पाया है |
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Wednesday, 30 May 2012

मैं तुमको प्यार करता हूँ तुम्हे बतला न पाऊँगा ,
तुम्हारा ही रहूँगा ये तुम्हे जतला न पाऊंगा ,
समझ पाओ तो मेरे मौन की  भाषा समझ लेना ,
मैं आँखों से बता दूंगा लबों पर कुछ न लाऊंगा |
मैं  जिंदा हूँ तो तेरे साथ परछाई सरीखा हूँ ,
जो मर जाऊँगा तो भी साथ तज तेरा न जाऊँगा |


बदनसीब हूँ मैं

लोग कहते हैं बदनसीब हूँ मैं ,
कोई भी साथ तक नहीं चलता ,
जो भी आता है वो एहसान सा कर जाता है 
राह में दीप तक नहीं जलता,
और तो और तू भी मेरा नहीं ,
जिसके एहसास से मैं जिंदा हूँ ,
पंख जिसके क़तर दिए हैं गए ,
मैं वो टूटा हुआ परिंदा हूँ ,
तुझको मालूम नहीं है शायद 
एक तू ही है मुझे छोड़ जो नहीं सकता ,
मेरी सांसों में बस गया है ज़िंदगी कि तरह ,
तू अलग जो हुआ तो मैं भी जी नहीं सकता |

मेरा आइना है तू

मेरा आइना है तू ,
तुझमे मैं खुद को ढूंढ लेती हूँ ,
अपनी परछाईं भी पहचान नहीं पाती हूँ ,
जब कभी सांस तेरी सांस के संग लेती हूँ |
क्या बता पायेगा तू मुझको ,
मुझको हर शय में नज़र किसलिए तू आता है ,
तू मुझे दर्द भी देता है अगर जान मेरी ,
तो भी तू जान से प्यारा क्यूँ हुआ जाता है ,
तुझको न देखूं तो आँखों में नमी होती है ,
तुझको न सोचूँ तो दिल भी उदास होता है ,
हाँथ बस तेरी ही तस्वीर रचा करते हैं,
और ज़हन भी मेरा बस तेरा हुआ जाता है ,
पाँव भी तेरी तरफ बेवजह ही बढ़ते  हैं ,
कौन है तू मेरा किस दुनिया से तू आया है ,
जब कभी ये सवाल दिल में मेरे आता है ,
फिर वही लगता है ,
मेरा आइना है तू ,
तुझमे मैं खुद को ढूंढ लेती हूँ |