Monday, 28 January 2013

ईश का वरदान है
फिर तुम्हारा यूँ मुझे स्वीकार लेना ,
ईश का वरदान है
तेरा मुझको साथ चलने का सदा अधिकार देना ,
ईश का वरदान है
तू और तेरा साथ मुझको |
बेसाख्ता वो हमसे यूँ लड़ते चले गए
और उनकी इस ऐडा पे हम मरते चले गए ।
कहते रहे वो हमसे बेरुखी के हर इक लफ्ज़ ,
और हम उन्ही की राह पर बढ़ाते चले गए ।
मौका भी था दस्तूर भी कहने का दिल की बात ,
ना जाने फिर भी हम वहां क्यूँ मौन रह गए ।
मुझे फिर से नहीं अब खोलनी हैं सांकलें दिल की ,
है दुनिया में

Wednesday, 15 August 2012

दिल में है विश्वास नहीं

अब दिल में है विश्वास नहीं ,
जीने की कोई चाह नहीं ,
सब झूठे और मक्कार मिले ,
क्यूँ इस दुनिया में प्यार नहीं |
हमने गंगा बन कर सबके ही पापों का संघार किया ,
हमने भोले बन कर देखो हर बार सदा विषपान किया ,
जिसको चाहा दिल से चाहा बस एक गुनाह यही था पर ,
इस एक समर्पण पर मुझको क्यूँ साथ तेरा वरदान नहीं |
अब दिल में है विश्वास नहीं ,
जीने की कोई चाह नहीं ,
सब झूठे और मक्कार मिले ,
क्यूँ इस दुनिया में प्यार नहीं |

प्यार की शुरुआत

फिर हमसे एक गुनाह की शुरुआत हो गयी ,
सोचा नहीं समझा नहीं ये बात हो गयी |
कैसे तुम्हे समझाएं ये कैसे ये बताएं ,
हमने जलाये दीप फिर भी रात हो गयी |
वरदान में तो हमको मिली थी बड़ी खुशियाँ ,
फिर भी न जाने कैसे ये बरसात हो गयी |
हर बार की तरह है उसी राह पर हमदम ,
जिस राह पे काँटों से थी पहचान हो गयी |
जो हमको मिले थे हमारे दोस्त बन के वो ,
अपने नहीं थे बात सरेआम हो गयी |
फिर से करी रोशन है जिसने जीने की शमाँ ,
उस शख्स से फिर प्यार की शुरुआत हो गयी |

तरफदारी

Monday, 13 August 2012

फिर प्रणय की बात होगी|

फिर प्रणय की बात होगी,
रात बीती है बहुत दिन बाद फ़िर है प्रात आई,
और जीवन ने खुशी से फिर करी है यूँ सगाई ,
झूठ सारे खो गए है, सत्य ने अवाज़ दी है,
मौन मुखरित हो रहा हैं, प्रीत ने बरसात की है ,
आज फिर इस नव घड़ी में इक नवल मुसकान होगी,
फिर प्रणय की बात होगी|